जिस हृदय में हो प्रभु प्रेम की प्रेरणा,

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जिस हृदय में हो प्रभु प्रेम की प्रेरणा,

तर्ज: जिस गली में तेरा घर न हो

जिस हृदय में हो प्रभु प्रेम की प्रेरणा,
उस हृदय में कभी अवगुण कभी भरना नहीं
कर्म ऐसा हो जिसमें ना उसकी रज़ा,
लाभ कितना भी हो फिर भी करना नहीं ॥ जिस हृदय में…

तू ये काम क्रोध लोभ मोह को छोड़ दे
बासना के अन्धेरों से मुख मोड़ ले
छोड़ विषयों को, मन प्रभु संग जोड़ दे
कर्म ऐसा हो जिसमें लगे डर शरम,
भूलकर भी उसे कभी करना नहीं ॥ जिस हृदय में..

मन को प्रेम से सजा वैर द्वेष छोड़ दे,
अप्रशस्त भाव आयें उलटे पाँव मोड़ दे,
आगे बढ़ दुश्मनी को पीछे छोड़ दे,
जिन दीवारों से होता है प्रेम अलग,
बीच में दो दिलों के खड़ी करना नहीं ॥ जिस हृदय में ..

छल कपट झूठ से नाता तोड़ दे,
ना ही निन्दा चुगलखोरी पे जोर दे
लोभ लालच बुरी लूटपाट छोड़ दे

ऐसे कर्मों से बिक जाती शर्मोहया
सौदा घाटे का तो कभी करना नहीं ॥ जिस हृदय में….

धन कमाने में छोड़ी ना कोई कसर,
सोना चाँदी भरे हीरे मालोजहर
त्याग की ना कोई तूने कीनी कदर
जोड़ में जोड़ कर और भी जोड़कर
क्या समझ बैठा तूने कभी मरना नहीं ॥ जिस हृदय में….

सारा जीवन रहा करता मनमानियाँ,
सोच पाया ना क्या होगी परेशानियाँ
ना कमाई जीवन में नेकनामियाँ
तेरे पापों में ईश्वर बता क्या करे ?
चोट खा के भी तुझको सम्भलना नहीं ॥ जिस हृदय में…

राह कंटक भरी जो बनाई बदल
आजा प्रभु की शरण ताके जाए संभल
शरण प्रभु की करे तेरी राह सरल
ज्ञान वेदों से ले शुभ कर्म कमा,
तुझको आवागमन से क्या तरना नहीं? ॥ जिस हृदय में…

(रजा) मर्जी (अप्रशस्त) युरा, निन्दनीय