ओ३म् नाम जपले मनवा ओ३म् नाम ध्याले

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ओ३म् नाम जपले मनवा ओ३म् नाम ध्याले

तर्ज : मुके आज झाले मुके आज झाले

ओ३म् नाम जपले मनवा ओ३म् नाम ध्याले

पीले ओ३म् अमृत प्याला रत्नधन कमा ले ॥

ओ३म् नाम से प्रकाशित संसार सारा

मन बुद्धि चित्त आत्मा ने ज्ञान को पसारा

ओ३म् नाम गा के वर्षा सुख की बरसा ले ॥ पी ले ॥

लगे रंग फीके सारे, ओ३म् रंग पाके

मिले हर्ष निज आत्मा को ओ३म् में समा के

पाले सद्गुणों की शक्ति अवगुण हटाले ॥ पी ले ॥

करे ओ३म् जीवन सरल नम्रता बढ़ाए

पल पल निशदिन मद को हटाए

ओ३म् के स्मरण से साधक वन के मुक्ति पाले ॥ पी ले ॥

ओ३म् सुधा की वेदों में वहे अमृत धारा

योगी ऋषि ज्ञानियों का तारन हारा

ओ३ममामृत के प्यासे मनवा प्यास बुझाले ॥ पी ले ॥

ओ३म् की शरण में आजा ओ३म् नाम प्यारा

ओ३म् नाम दुःख विसारे सुख का सहारा

ओ३म् ध्यान करके जीवन यज्ञमय वना ले ॥ पी ले ॥