सुमिरन कर ले, साँझ सबेरे मिट जाएँगे

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सुमिरन कर ले, साँझ सबेरे
मिट जाएँगे – सब दु:ख तेरे
हरी का ध्यान लगा मन मेरे (1)

जल में थल में, नील गगन में
कण-कण में है, प्रभु की माया
रे भाई
जिसने मन की आँखें खोली
उसने, उसका दर्शन पाया रे
जो नर हरी की माला फेरे (1)
मिट जाएँ जनम जनम के फेरे
हरी का ध्यान लगा मन मेरे

डगर डगर पर झूठा मेला
और माटी है झूठी माया रे
कौन साथ धन लेकर आता रे
कौन साथ धन लेकर जाता रे
जग में सबके रैन बसेरे
कौन किसी के साथ चला रे
हरी का ध्यान लगा मन मेरे
मिट जाएँ जनम जनम के फेरे
सुमिरन कर ले, साँझ सबेरे
मिट जाएँ जनम जनम के फेरे

हरी का ध्यान लगा मन मेरे (1)
जो नर हरी की माला फेरे (1)