प्यारे प्रभु से नाता, नहीं तोड़ना।
तर्ज – तेरे संग प्यार मैं नहीं छोड़ना……
प्यारे प्रभु से नाता, नहीं तोड़ना।
सुबह शाम उसकी भक्ति, नहीं छोड़ना ॥
प्यारे……
है सागर कहीं पे कहीं झील है
गुनगुनाती हवा ये सुहानी
कहीं आता है तूफान लगता है
डर उस विद्याता का कोई ना शानी,
कोई ना शानी कभी ना
सचिन “सारंग”, मुँह मोड़ना नाता……
चाँद सूरज सितारें ये
जिसने रचे अर्श का जिसने
आंगन सजाया बादलों में
ये बिजली चमकती है
जो उस प्रभु ने ये जादू दिखाया,
जादू दिखाया अपने प्रभु से दिल,
को जोड़ना नाता…..










