मय के प्यालों से पीछा छुड़ा ले

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मय के प्यालों से पीछा छुड़ा ले

तर्ज – इश्क में हम तुम्हें……

मय के प्यालों से पीछा छुड़ा ले,
नाश तेरे ये घर का करेंगे।
मौत आने से, पहले ही नादां,
ये चिता में तुझे ले धरेंगे।।

तू भी मन में ‘सचिन’ सोचता है
बीवी बच्चे भला क्यों मरेंगे
रास्ता कोई, फिर ना बचेगा
गर्दिशों में ये जब सब घिरेंगे
मय के प्यालों से…….

इन बच्चों का जीवन बचा ले
जुल्म इनपे तू क्यूँ ढा रहा है
भूखे प्यासे ये, रोते बिलखते
यूंही सड़कों पे रोते फिरेंगे
मय के प्यालों से…….

तेरी अर्द्धांगिनी भी बेचारी
मुँह छुपाकर के दिन काटती है
कहती फिरती है, मेरे ये बाले
मयपरस्ती में एक दिन बिकेंगे
मय के प्यालों से……

वक्त बाकी है कुछ तो संभल जा
बोतलों से तू दामन बचा ले
तेरी बीवी ये, बच्चे ये तेरे,
खाके सब जहर को मरेंगे
मय के प्यालों से…….