कर ले रे भजन इस जीवन में
तर्ज – आ जाओ तड़फ्ते हैं अरमा……
कर ले रे भजन इस जीवन में,
ये उम्र गुज़रने वाली है।
कर ले दर्शन दिल दर्पण में,
ये उम्र गुज़रने वाली है।
उससे ही ‘सचिन” तू हार गया है
दाता दयालू वो ही विभु
वो रमा हुआ है कण-कण में
ये उम्र गुज़रने वाली है……
कर ले रे………
जाये जहाँ तक तेरी नज़र
वो देगा दिखायी प्रभु उधर
क्यूं ढूंढ़ रहा पागलपन में
ये उम्र गुज़रने वाली है……
कर ले रे………
ना देगा दिखायी उसका रे
घर कर ले जीवन में थोड़ा
सबर ढूंढ़े से मिलेगा वो
मन में ये उम्र गुज़रने वाली है……
कर ले रे………










