अब ना मैं गाऊँ राग रे

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अब ना मैं गाऊँ राग रे,

तर्ज – शास्त्रीय संगीत

अब ना मैं गाऊँ राग रे,
मन मोरा घबराये। हाय रे……
मन मोरा घबराये।

वक्त मिला तो फिर गाऊँगा
गाके कोई राग सुनाऊँगा
बात सचिन ‘सारंग’ दोहराऊँगा
अब तो दिल शर्माये अब ना मैं……

कौन सा अब मैं नगमा गाऊँ कैसे
अब मैं तुम्हें रिझाऊँ कैसे
अपना मन समझाऊँ मेरी
कुछ ना समझ में आये
अब ना मैं……

है दुःखी अब ये मन
मेरा मेरे जीवन में है
अंधेरा न जाने कब होगा
सवेरा मैं तो बैठा आस लगाये
अब ना मैं……