सत्कर्मों से मिली जिन्दगानी
जो माने समझे वही है सुजानी ॥
आ रहा है इकपल इक जा रहा है
कोई सुख तो कोई दुःख पा रहा है
ये कर्मों का लेखा ही, जीवन कहानी ॥ जो जाने…
मन विषयों में उलझा रहा है
प्रभु हैं निकट तू दूर जा रहा है
कैसी है तेरी, ये नादानी ॥ जो जाने…
है दूर मंजिल राह अजानी
चला जो सुपथ समझो वही ज्ञानी
साधें जीवन को, साधु सन्त ध्यानी ॥ जो जाने….
दो दिन की है तेरी जिन्दगानी
कहीं व्यर्थ में ना जाए जवानी
पाले जीवन में, तू नेकनामी ॥ जो जाने…
(नेकनामी) कीर्ति, यश
तर्ज: लफ्जों की है ये ज़िन्दगानी










