आपके आशीष से प्रभु शुद्ध होने आत्मा

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आपके आशीष से प्रभु शुद्ध होने आत्मा

सत्य ज्ञान का पथिक बनकर पाऊँ सुख परमात्मा ॥

लालसा जागी मेरे मन तेरे अमृत बूंद की

जिसको पाकर सूर्यचन्द्र है झूमता अन्तरिक्ष भी

फूल वनस्पतियाँ लताओं में बहे आनन्द सा

पंख पसारे गीत छाए लोकान्तरों में पवन का ॥ आपके आशीष से…

दान अनुपम ईश तेरा प्राण जगत में भरा रहा

रश्मियों से सूर्य की पुलकित धरा को कर रहा

ज्वार की लहरों से उठता गीत मधुमय सागरों का

घन का धन पाने को धरती करती रहती याचना ॥ आपके आशीष से…

हर दिशा मंगल स्वरों से गीत गाती हर्ष से

विश्व परमानन्द में डूबा सोम के मधुस्पर्श से

भावनाओं की तरंगों से उठा संगीत सा

दे भले इक बूँद अमृत की मुझे विश्वात्मा ॥ आपके आशीष से….

प्राणवन्त अनन्त बहता विश्व का ये सोम सागर

वेद के ऋषियों की भर देता प्रभु अमृत से गागर

पाते वर सात्विक जीवन में आनन्द और उल्लास का

ऐसी शुद्ध आत्मा को मिलते परमपिता परमात्मा ॥ आपके आशीष से…

(पथिक) यात्री, मुसाफिर (लालसा) प्रबल इच्छा, उत्कंठा, उत्सुकता (पुलकित) रोमांचित,

गद्गद्, आनन्द (घन), बादल, मेष (विश्वात्मा) विश्व की आत्मा, परमेश्वर (प्राणवन्त)

प्राणों को प्रसन्न करनेवाला (सोमसागर) परम शान्ति का सागर ।

तर्ज :जायते जाशील तू रे