बूँद दे अमृत भरी
प्यासी चातक जैसे अखियाँ
प्रीत बावरी उमड़ आए
तेरे दर्शन को मेरी……
सत्य रूप है ओ३म् प्यारा,
प्राणी मात्र का इक सहारा
जब भी हृदय से पुकारा
बाँह थामी और उबारा
मन हृदय चित्त ओ३म् ध्याये,
साँस जब तक आखिरी ॥ बूँद दे…
तीन स्वर में त्रिलोक गूंजे,
अन्तरिक्ष द्यौः और पृथ्वी
ओ३म् ज्योति में विश्व व्यापे,
दिव्य स्वर गुण अतुलनीय
ज्ञान के अमृत कलश से,
दे सुधा माँ सरस्वती ॥ बूँद दे..
मन के नयनों में समाई प्रीत तेरी मोहनी
बुझ न पाए प्यास भगवान् चाह तुझको खोजती
आत्मा कर दे प्रकाशित ज्ञान धन दे, हे धनी ! ॥ बूँद दे..
तर्ज: धुंद होऊनी सरवरी










