देश को नौजवान चाहते हैं।
देश को नौजवान चाहते हैं।
देने को बलिदान चाहते हैं।।
समय की चुनौती, स्वीकार कर लो।
वतन के लिये सर, हथेली पै धर लो।
दुखी निःसहायों की पीड़ायें हर लो।
आज हम इम्तहान चाहते हैं।
वक्त की पहिचान चाहते हैं।।1।।
सती साध्वी नित्य सीता हरण हैं।
अनेकों ही रावण खरदूषण हैं।
नई कई लिखनी रामायण हैं।।
लखन राम हनुमान चाहते है।
खून में उफान चाहते हैं।।2।।
निकम्मे निठल्ले मजा कर रहे क्यों।
ये भूखे व नंगे श्रमिक मर रहे क्यों ।।
सत्य कहने से आदमी डर रहे क्यों।
आज हम समाधान चाहते हैं।।
दुःख से परित्राण चाहते हैं।।3।।
धृणा द्वेष क्यों है छूआछात कैसी।
अपनों के संग में खुराफात कैसी ।।
गैरों के संग में मुलाकात कैसी।
जिन्दगी स्वाभिमान चाहते हैं।।
शान बान आन चाहते है।।4।।
अपूज्यों की पूजा यहां हो रही है।
पूज्यों की दुर्दशा यहां हो रही है।।
न्याय प्रिय जनता यहां रो रही है।।
चरित्रवान इन्सान चाहते मिटाना
अज्ञान चाहते हैं।। हैं।।5।।
सरहद के ऊपर विदेशों के हमले।
मिटाकर उन्हें आज प्रेमी तू दम ले ।।
राकेट टैंक तोप-विमान बम ले।
जंग का एलान चाहते है।।
नहीं पाकिस्तान चाहते है। ।6।।









