कागज कलम हाथ में दिल में दर्द आंख में पानी
कागज कलम हाथ में दिल में
दर्द आंख में पानी,
तन कम्पित हुआ लिखने लगी
जब दर्दगेंज कहानी।
जिस बेटी को माँ जी प्यार का
दूध पिलाकर पाला,
जिस पुत्री को पिताजी
सुखों के सांचे में ढाला,
जिस बच्ची का तन कोमल
कलियों की तरह सम्भाला,
उस बेटी का जीवन धन
अग्नि में फुंकने वाला,
जितने दिन को आई थी
मेरी खत्म हुई मेहमानी ।।1।
आपने तो एक सुन्दर सूरत देखा
सुघड़ जमाई,
भोली सूरत वाले देखे
सम्बन्धी सुख दाई,
कौन जानता था यह साधू वेष में
निरे कसाई,
मुख में राम हाथ में माला
बगल में छुरी छिपाई,
आज वही जुल्मों की
छुरी मेरी ले रही है जिन्दगानी । ।2।।
आखिरी मेरा प्रणाम पिताजी
जरा निराश न होना,
माँ जी कसम तुमको है,
मेरी याद में तुम ना रोना,
मेरी ही किस्मत खोटी थी
यही था आखिर होना,
निर्दयीता से तोड़ दिया है
यह जीवन का खिलौना,
कलको केवल नाम याद
रह जागी मेरी निशानी।। 3 ।।
दुनियां वालों एक बात यह मेरी
भूल मत जाना,
पक्के महल जमीन देख करके
मत धोखा खाना,
अपनी बहन बेटियों को
मत बूचड़ को पकड़ाना,
गला घोट देना बेशक पर
लोभी से मत ब्याहना,
इन्सानों के चोले में है
आज छिपी शैतानी ।।4।।










