श्रीमद्दयानन्द कन्या गुरुकुल महाविद्यालय द्वारा नारी शक्ति जागरण-शिविर
1 जून से 10 जून 2025 तक – आत्मरक्षा एवं चरित्र निर्माण का अनुपम अवसर
जिस भवन की नींव जितनी मजबूत होती है, वह उतना ही सुदृढ़ होता है। इसी प्रकार, राष्ट्र की नींव भी तभी सशक्त हो सकती है जब नारी शक्ति बौद्धिक एवं शारीरिक रूप से बलशाली हो। इसी उद्देश्य से श्रीमद्दयानन्द कन्या गुरुकुल महाविद्यालय, चोटीपुरा (जनपद-अमरोहा, उत्तर प्रदेश) में “नारी शक्ति जागरण-शिविर” का आयोजन किया जा रहा है।
यह विशेष प्रशिक्षण शिविर 1 जून से 10 जून 2025 तक आयोजित होगा, जिसमें 18-35 वर्ष की बालिकाएँ एवं महिलाएँ भाग ले सकती हैं। शिविर में आत्मरक्षा, शारीरिक सशक्तिकरण, वैदिक संस्कृति, यज्ञ, संस्कार, योग एवं बौद्धिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शिविर का उद्देश्य
शिविर के माध्यम से महिलाओं को न केवल आत्मरक्षा के गुर सिखाए जाएंगे बल्कि उन्हें वैदिक संस्कृति एवं सनातन धर्म के मूल्यों से भी जोड़ा जाएगा। इस प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को मानसिक, शारीरिक एवं आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाना है ताकि वे समाज में आत्मनिर्भर एवं आत्मविश्वास से भरपूर बन सकें।
प्रशिक्षण सत्र एवं गतिविधियाँ
शिविर में विभिन्न शारीरिक एवं बौद्धिक सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:
1. शारीरिक सत्र
✔ आत्मरक्षा प्रशिक्षण – जूडो, कराटे, लाठी, तलवार, भाला, कल्लरी पट्टू
✔ योग एवं व्यायाम – सूर्यनमस्कार, दण्ड-बैठक, प्राणायाम
✔ खेल गतिविधियाँ – आधुनिक खेलों का प्रशिक्षण
✔ आयुर्वेद एवं घरेलू चिकित्सा का सामान्य ज्ञान
2. बौद्धिक एवं सांस्कृतिक सत्र
✔ वैदिक एवं सनातन संस्कृति से संबंधित बौद्धिक विचार-विमर्श
✔ यज्ञ प्रशिक्षण एवं वैज्ञानिक आधार पर यज्ञ के लाभ
✔ संस्कार निर्माण – आदर्श जीवन, धर्म-अधर्म, ईश्वर उपासना, राष्ट्र प्रेम
✔ संगीत प्रशिक्षण एवं वैदिक मंत्रोच्चारण

शिविर की दिनचर्या
शिविर में प्रतिदिन सुव्यवस्थित और अनुशासित दिनचर्या का पालन किया जाएगा:
प्रातःकालीन दिनचर्या
- सुबह 4:45 से 5:00 बजे तक – दिन की शुरुआत प्रार्थना से होगी, जिससे मन को शांति एवं ऊर्जा प्राप्त होगी।
- सुबह 5:00 से 5:30 बजे तक – नित्यक्रिया का समय रहेगा, जिसमें व्यक्तिगत स्वच्छता और दिन की तैयारी होगी।
- सुबह 5:30 से 7:00 बजे तक – शारीरिक व्यायाम, योगासन, प्राणायाम और सूर्यनमस्कार का अभ्यास कराया जाएगा।
- सुबह 7:00 से 7:30 बजे तक – स्नान का समय निर्धारित किया गया है।
- सुबह 7:30 से 8:30 बजे तक – यज्ञ-प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें यज्ञ की विधि, मंत्रोच्चारण और वैज्ञानिक लाभों पर चर्चा होगी।
- सुबह 8:30 से 9:00 बजे तक – प्रातराश (नाश्ता) का समय रहेगा।
पूर्वाह्न (सुबह के बाद) की दिनचर्या
- सुबह 9:15 से 10:30 बजे तक – बौद्धिक सत्र (प्रथम) आयोजित किया जाएगा, जिसमें वैदिक संस्कृति, धर्म-अधर्म, कर्म एवं कर्मफल जैसे विषयों पर मार्गदर्शन मिलेगा।
- सुबह 10:45 से 12:00 बजे तक – बौद्धिक सत्र (द्वितीय) होगा, जिसमें आत्मनिर्भरता, संस्कार एवं आदर्श जीवन पर चर्चा होगी।
- दोपहर 12:15 से 1:30 बजे तक – संगीत प्रशिक्षण एवं वैदिक मंत्रोच्चारण का अभ्यास कराया जाएगा।
अपराह्न (दोपहर) की दिनचर्या
- दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक – भोजन एवं विश्राम का समय रहेगा, जिससे शरीर को आराम मिल सके।
- दोपहर 3:00 से 4:15 बजे तक – बौद्धिक सत्र (तृतीय) आयोजित होगा, जिसमें राष्ट्र प्रेम, शिष्टाचार और ईश्वर उपासना जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
- दोपहर 4:15 से 4:45 बजे तक – विश्राम एवं फलाहार का समय रहेगा।
सायंकालीन दिनचर्या
- शाम 5:00 से 6:30 बजे तक – शारीरिक प्रशिक्षण एवं खेल गतिविधियाँ कराई जाएंगी, जिसमें लाठी, भाला, तलवार, कल्लरी पट्टू, जूडो-कराटे जैसी आत्मरक्षा कलाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- शाम 6:45 से 7:45 बजे तक – संध्या, सत्संग एवं प्रेरणादायक उद्बोधन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
- रात 7:45 से 8:15 बजे तक – रात्रि भोजन का समय निर्धारित किया गया है।
- रात 8:15 से 8:40 बजे तक – भ्रमण का समय रहेगा, जिससे दिनभर की गतिविधियों के बाद तन-मन को विश्राम मिल सके।
- रात 8:40 से 9:40 बजे तक – मनोरंजन का समय होगा, जिसमें प्रेरणादायक कहानियाँ, भजन-कीर्तन आदि गतिविधियाँ होंगी।
- रात 9:40 बजे – रात्रि-मंत्र एवं विश्राम के साथ दिनचर्या समाप्त होगी।

शिविर में प्रवेश हेतु आवश्यक जानकारी
✔ पंजीकरण शुल्क: ₹500/- (गैर-वापसी योग्य)
✔ शिविर शुल्क: ₹5000/- (शिविर स्थल पर भुगतान करना होगा)
✔ पंजीकरण अंतिम तिथि: 31 अप्रैल 2025
✔ पंजीकरण लिंक: https://forms.gle/a1GXVbP6tdGiZUGh7
स्थान एवं संपर्क विवरण
📍 स्थान: श्रीमद्दयानन्द कन्या गुरुकुल महाविद्यालय, चोटीपुरा, जनपद-अमरोहा (उत्तर प्रदेश)
📞 संपर्क सूत्र:
- 9758197980
- 9927077327
- 9410056016
समाप्ति विचार
यह “नारी शक्ति जागरण-शिविर” न केवल आत्मरक्षा एवं शारीरिक सशक्तिकरण के लिए एक सुनहरा अवसर है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। वैदिक संस्कृति, आत्मनिर्भरता एवं राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत यह शिविर महिलाओं को आत्मविश्वास, आत्मरक्षा एवं चारित्रिक दृढ़ता प्रदान करेगा।
यदि आप भी आत्मरक्षा, वैदिक संस्कृति एवं चरित्र निर्माण का गहन प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहती हैं, तो आज ही अपना पंजीकरण कराएं!
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