“यत्र नार्यस्तु पूजन्ते रमन्ते तत्र देवताः”
संस्कृत वाङ्मय में नारी को पूजनीय एवं समाज की आधारशिला माना गया है। नारी शिक्षा के बिना किसी भी सभ्यता का पूर्ण विकास असंभव है। इसी उद्देश्य से महर्षि पाणिनि कन्या वेद पाठशाला, छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र) की स्थापना की गई, जहाँ कन्याओं को वेद, संस्कृत और पारंपरिक भारतीय शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विषयों में भी दक्ष बनाया जाता है।
विस्तार केंद्र – पाणिनि कन्या महाविद्यालय, वाराणसी (काशी)
वाराणसी, जिसे संस्कृति और विद्या की राजधानी कहा जाता है, वहाँ स्थित पाणिनि कन्या महाविद्यालय इस शिक्षा प्रणाली का प्रमुख केंद्र है। यह संस्था दक्षिण भारत और महाराष्ट्र की एकमात्र कन्या गुरुकुल है, जो –
- प्राचीन आर्ष ग्रंथों की शिक्षा – छात्राओं को ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का सस्वर अध्ययन कराया जाता है।
- सस्वर वेद पाठ – वैदिक उच्चारण की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
- संस्कृत व्याकरण और भाषाशास्त्र – पाणिनि के अष्टाध्यायी व्याकरण से लेकर संपूर्ण संस्कृत साहित्य का गहन अध्ययन कराया जाता है।
- आधुनिक विषयों का प्रशिक्षण – पारंपरिक शिक्षा के साथ गणित, विज्ञान, इतिहास, भूगोल, कंप्यूटर विज्ञान और अंग्रेजी जैसी आधुनिक विषयों की भी पढ़ाई कराई जाती है।
यह गुरुकुल कन्याओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों की शिक्षा देता है।
२०२५-२६ के लिए प्रवेश प्रारंभ
महर्षि पाणिनि कन्या वेद पाठशाला में आगामी शैक्षणिक वर्ष २०२५-२६ के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
प्रवेश संबंधी आवश्यकताएँ
- कक्षा ४, ५, ६ के लिए प्रवेश खुला है।
- प्रवेश के लिए शिविर (शिबिर) अनिवार्य है।
- शिविर में भाग लेने हेतु पंजीकरण आवश्यक है।
- शिविर में वेद शिक्षा, नैतिक शिक्षा, योग, ध्यान, और पारंपरिक जीवनशैली का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
संस्था के प्रमुख स्तंभ
संस्थापिका
संस्था की स्थापना का श्रेय डॉ. प्रज्ञादेवी और डॉ. मेघादेवी को जाता है, जिन्होंने नारी शिक्षा को वेदों से जोड़ने का महान कार्य किया है। वेद शिक्षण के माध्यम से कन्याओं को आत्मनिर्भर और विदुषी बनाने की उनकी प्रेरणा आज एक व्यापक आंदोलन का रूप ले चुकी है।
प्रधान आचार्या
संस्थान की प्रमुख आचार्या मंदिता शाली हैं, जो पाणिनि कन्या महाविद्यालय, वाराणसी की संचालन प्रमुख हैं।
ट्रस्टी
संस्थान के प्रमुख ट्रस्टी डॉ. लक्ष्मण ना. माने (आर्य) हैं, जो गुरुकुल की समस्त गतिविधियों की देखरेख करते हैं।
📞 संपर्क: ९२२५११११५३
प्रधान संचालिका
संस्थान का प्रशासनिक कार्य सौ. अंजू माने द्वारा संचालित किया जाता है।
📞 संपर्क: ९५७९५५००३०
शैक्षणिक विशेषताएँ और गतिविधियाँ
संस्थान न केवल वेद शिक्षा प्रदान करता है, बल्कि छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए कई अन्य गतिविधियाँ भी संचालित करता है:
वैदिक शिक्षा प्रणाली
- सस्वर वेद पाठ और स्मृति ग्रंथों का अध्ययन
- शास्त्रार्थ (विचार-विमर्श और तर्कशास्त्र)
- योग और ध्यान का प्रशिक्षण
- संस्कृत भाषा और साहित्य का गहन अध्ययन
आधुनिक शिक्षा प्रणाली
- गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी की शिक्षा
- कंप्यूटर और तकनीकी शिक्षा
- आत्मरक्षा और शारीरिक शिक्षा
- कला, संगीत और हस्तकला प्रशिक्षण
संस्कार और व्यक्तित्व विकास
- नैतिक और जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षण
- नारी सशक्तिकरण हेतु विशेष कार्यशालाएँ
- समाज सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना
संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने के लाभ
✔ वेदों और भारतीय संस्कृति की गहरी समझ
✔ आध्यात्मिक एवं बौद्धिक विकास
✔ आत्मनिर्भर और संस्कारित जीवनशैली
✔ उच्च कोटि की शिक्षा एवं रोजगार के अवसर
✔ भारतीय परंपरा के संरक्षण में योगदान
संपर्क करें
मुख्य कार्यालय
📍 पाणिनि कन्या महाविद्यालय, तुलसीपुर, महमूरगंज, वाराणसी – २२१०१०, उत्तर प्रदेश
📞 ९२३५५३९७४०
गुरुकुल स्थान
📍 “आर्य भवन” प्लॉट नं. १२६ / १२९, जय गजानन नगर, गारखेडा परिसर,
छत्रपति संभाजीनगर – ४३१ ००९ (महाराष्ट्र)
अपनी बेटियों को वेदों की रोशनी से रोशन करें – आज ही संपर्क करें!
मधुर भजन सुनने के लिए यहां क्लिक करें 👈
.










