नवसस्येष्टि यज्ञ एवं होली मिलन समारोह हर्षोल्लास से सम्पन्न: गाज़ियाबाद

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Navasasyeshti Yajna evam Holi Milan Samaroh harshollas se sampann Ghaziabad 2025

नवसस्येष्टि यज्ञ एवं होली मिलन समारोह हर्षोल्लास से सम्पन्न

“भारतीय संस्कृति दान देकर, बाँट कर खाने में विश्वास करती है” – रामोतार शास्त्री
“होली एक प्राकृतिक पर्व है, ऐतिहासिक नहीं” – कृष्ण शास्त्री

📍 गाज़ियाबाद, शुक्रवार, 14 मार्च 2025 – नगर आर्य समाज नया गंज में वासंती नवसस्येष्टि यज्ञ एवं होली मिलन समारोह उत्साह और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।

Navasasyeshti Yajna evam Holi Milan Samaroh harshollas se sampann Ghaziabad 2025

🔆 कार्यक्रम की शुरुआत वेदपाठी रामोतार शास्त्री के ब्रह्मत्व में वासंती नवसस्येष्टि यज्ञ से हुई, जिसके मुख्य यज्ञमान श्रीमती एवं श्री दिनेश मित्तल रहे। उन्होंने यज्ञ एवं होली के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में भोजन को ग्रहण करने से पहले यज्ञ में अर्पण करने की परंपरा रही है। यह पर्व हमें दान और सामूहिक आनंद का संदेश देता है। उन्होंने सभी यज्ञमानों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद एवं समृद्ध जीवन की कामना की।

🎶 संगीतमय होली मिलन समारोह में योगी प्रवीण आर्य द्वारा गाया गया गीत—
“जो होली, सौ होली, भुला दो उसे,
आज मिलने-मिलाने का त्यौहार है!”

… सुनकर उपस्थित जनसमूह झूम उठा। उन्होंने सभी को होली की शुभकामनाएँ दीं।

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📜 मुख्य वक्ता आचार्य कृष्ण शास्त्री ने अपने उद्बोधन में कहा—

“जैसे गन्ने की छोटी-छोटी गांठें जितनी समीप होती हैं, उतना ही गन्ना मजबूत होता है। वैसे ही, हमारे जितने अधिक पर्व होंगे, हम उतने ही एकजुट होंगे।”

उन्होंने बताया कि संस्कृत शिक्षा के अभाव में हम अपने पर्वों के वास्तविक अर्थ को नहीं समझ पाए हैं। होली का मूल स्वरूप “वासंती नवसस्येष्टि होलकोत्” है, जिसमें नव-अन्न को यज्ञ में अर्पित करने की परंपरा रही है। संस्कृत शिक्षा के अभाव में हमें वास्तविक तथ्यों का ज्ञान नहीं हो पाया। होली का यथार्थ तिनको की अग्नि में भूने हुए अधपके फली युक्त फसल को होलक (होला) कहते है अर्थात् जिन पर छिलका होता है, जैसे हरे चने आदि। ऋतु के अनुसार,दो मुख्य प्रकार की फसलें होती हैं। 1)खरीफ ,2)रवि। रवि की फसल में आने वाले सभी प्रकार के अन्न को होला कहते है। इस यज्ञ के बाद ही नई फसल का अन्न ग्रहण करना शुभ माना जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि होली कोई ऐतिहासिक पर्व नहीं, बल्कि प्राकृतिक पर्व है

🔥 यज्ञ का आध्यात्मिक महत्व समझाते हुए मंच संचालक तेजपाल सिंह आर्य ने कहा—

“यज्ञ से प्राणवायु शुद्ध होती है, वर्षा जल पवित्र होता है और औषधियों की गुणवत्ता बढ़ती है। इसलिए, यज्ञ-हवन करना न केवल ईश्वरीय आज्ञा है, बल्कि आत्मिक और शारीरिक उन्नति का भी आधार है।”

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🎭 इस अवसर पर अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें बबली कसाना, श्रीपाल आर्य, नरेंद्र आर्य, अशोक गुप्ता, कमलेश गुप्ता, राजेंद्र शर्मा, पूजा, श्रुति आर्या, रचना पुरी, राजीव पुरी, उषा अग्रवाल, अंकिता अग्रवाल, लवलीन गुप्ता, भव्या गुप्ता, पियूष गुप्ता, पुलकित गुप्ता, राहुल आर्य आदि प्रमुख थे।

🙏 समाज के प्रधान भुवनेश्वर दत्त शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।

🕊 कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।



साभार – प्रवीण आर्य