योग परिवार होली मंगल मिलन समारोह हर्षोल्लास से सम्पन्न
गाजियाबाद, 12 मार्च 2025 – अखिल भारतीय ध्यान योग संस्थान, संत निवास कक्षा द्वारा आयोजित “योग परिवार होली मंगल मिलन समारोह” अत्यंत हर्षोल्लास और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल पारंपरिक त्योहार होली के रंगों से सराबोर था, बल्कि इसमें भारतीय संस्कृति, योग और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम भी देखने को मिला।

संस्कार और परंपराओं का संगम
कार्यक्रम का शुभारंभ योगी प्रवीण आर्य द्वारा ओ३म् की ध्वनि और गायत्री मंत्रोच्चार के साथ हुआ। उन्होंने होली के महत्व को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह त्योहार केवल रंगों का नहीं, बल्कि नवसस्येष्टि यज्ञ के माध्यम से नई फसल को ईश्वर को अर्पित करने और सामूहिक आनंद मनाने का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति हमेशा “दान देकर और बाँट कर खाने” में विश्वास रखती है, और होली इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
योगी प्रवीण आर्य ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन के साथ एक भावपूर्ण गीत “जो होली, सो होली, भुला दो उसे, आज मिलने-मिलने का त्यौहार है” गाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
योग एवं एरोबिक्स सत्र
इस उत्सव का एक महत्वपूर्ण भाग योग सत्र रहा, जिसमें योगाचार्य नेतराम ने धार्मिक गीतों की धुन पर एरोबिक्स का अभ्यास कराया। इसके बाद शवासन कराते हुए उन्होंने होली के संदर्भ में अपने विचार प्रस्तुत किए, जिससे सभी साधकों को आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा का अनुभव हुआ।

मुख्य अतिथि का सम्मान एवं संदेश
समारोह के मुख्य अतिथि समाजसेवी योगी राम प्रकाश गुप्ता का पीतवस्त्र ओढ़ाकर और चंदन तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि “पर्व हमें आपस में जोड़ते हैं, और होली मिलन इस भाईचारे का प्रतीक है।” इस दिन लोग पुराने गिले-शिकवे भुलाकर रंग-गुलाल लगाते हैं, गले मिलते हैं और आनंदपूर्वक साथ भोजन करते हैं। इससे समाज में प्रेम और सौहार्द बना रहता है।
संगीत, नृत्य और आध्यात्मिकता का संगम
कार्यक्रम में योग शिक्षिका सुमन बंसल, मीनाक्षी अग्रवाल, विभा भारद्वाज, जोली शर्मा और भारती अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत सुंदर नृत्य आकर्षण का केंद्र रहे। उनके होली के गीतों और नृत्य की प्रस्तुति ने पूरे माहौल को उमंग और उल्लास से भर दिया।
वरिष्ठ योग शिक्षिका वीना वोहरा ने सभी को होलिकोत्सव की शुभकामनाएँ दीं और सभी साधकों एवं उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
होली का आध्यात्मिक महत्व एवं यज्ञ परंपरा
मंच संचालन कर रहे योगी प्रवीण आर्य ने होली के आध्यात्मिक पक्ष को समझाते हुए बताया कि “होली नवसस्येष्टि यज्ञ का पर्व है, जिसमें नई फसल को ईश्वर को समर्पित कर धन्यवाद दिया जाता है।” उन्होंने बताया कि संस्कृत में अधभुने अन्न को ‘होलक’ कहा जाता है, और इसी से ‘होलिकोत्सव’ शब्द बना है। इसलिए होली पर हमें यज्ञ करना चाहिए और ईश्वर को नई फसल की आहुति देकर कृतज्ञता प्रकट करनी चाहिए। इस अवसर पर दैनिक अग्निहोत्र पुस्तक भी सभी साधकों को वितरित की गई।

सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण समापन
डॉ. प्रमोद सक्सेना ने इस कार्यक्रम की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की और आयोजकों का आभार जताया।
इस अवसर पर श्रीमती प्रीति कश्यप, वीनस गोयल, दर्शना मेहता, वीना गुप्ता, शालिनी गौड़, उमा शर्मा, सीमा अग्रवाल, माला सिंह, संजय खंडेलवाल एवं सत्यम सहित अनेक साधक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन शांति पाठ ,दैनिक अग्निहोत्र पुस्तक ग्रहण, प्रसाद वितरण और आपसी होली की बधाइयों के साथ हुआ। सभी साधक इस आनंददायक माहौल से ओत-प्रोत होकर अपने घरों को लौटे।
भवदीय,
प्रवीण आर्य,
मीडिया प्रभारी,
अखिल भारतीय ध्यान योग संस्थान
संपर्क: 9911404423
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