चाहे भँवर हो, चाहे पहाड़
चाहे भँवर हो
चाहे पहाड़
चाहे नगर हो
चाहे उजाड़
बड़ी सुख लाती है
तेरी दया प्रभु
दुखों से बचाती है
तेरी दया प्रभु
हो गमों की आँधी
जब सूझे न कोई सहारा
उलझनों ने घेरा
और डरता हो राही बेचारा
संकट की – घड़ियों में
धीरज बँधाती है
तेरी दया प्रभु
बड़ी सुख लाती है
तेरी दया प्रभु
चल दिया मुसाफिर
तेरे दर का जो
बन के दीवाना
मिल गया उसे तो
तेरी महती दया का खजाना
दूर करे सब काँटे
फूलों पे चलाती है
तेरी दया प्रभु
बड़ी सुख लाती है
तेरी दया प्रभु
हर कदम पे ठोकर
एक पग भी
न जाये बढ़ाया
घिर मुसीबतों में
जिसने हिम्मत से
दिल न हटाया
जंगल से मंजिल पे
“पथिक” पहुँचाती है
तेरी दया प्रभु
बड़ी सुख लाती है
तेरी दया प्रभु
चाहे भँवर हो
चाहे पहाड़
चाहे नगर हो
चाहे उजाड़
बड़ी सुख लाती है
तेरी दया प्रभु
दुखों से बचाती है
तेरी दया प्रभु










