स्वामी दयानंद जी एवं श्रद्धानंद जी की जयंती का भव्य आयोजन:आर्य समाज दुर्ग

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यह आयोजन महर्षि स्वामी दयानंद जी और स्वामी श्रद्धानंद जी के महान योगदान को स्मरण करने और समाज में उनके विचारों को पुनः जागृत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर था।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ:

  1. 2001 दीपों का प्रकाश उत्सव:
    • यह आयोजन महर्षि दयानंद जी की 201वीं जयंती के उपलक्ष्य में विशेष रूप से 2001 दीपों के साथ मनाया गया, जिससे यह एक भव्य और प्रेरणादायक आयोजन बना।
  2. महर्षि दयानंद जी की बोधरात्रि का स्मरण:
    • इस आयोजन में स्वामी दयानंद जी की उस ऐतिहासिक बोधरात्रि को भी श्रद्धा के साथ स्मरण किया गया, जब उन्होंने सच्चे शिव को पाने का संकल्प लिया था।
  1. महर्षि दयानंद का समाज सुधार में योगदान:
    • नारी शिक्षा, जातिगत भेदभाव, छुआछूत, सती प्रथा और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले स्वामी दयानंद जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
  2. क्रांतिकारियों के प्रेरणास्रोत:
    • कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि कैसे स्वामी दयानंद जी ने राम प्रसाद बिस्मिल, लाला लाजपत राय, श्याम जी कृष्ण वर्मा, पंडित लेखराम और स्वामी श्रद्धानंद जैसे महान देशभक्तों को दिशा दी।
  1. शुद्धि आंदोलन के प्रणेता स्वामी श्रद्धानंद जी की जयंती:
  2. आर्य समाज और आर्य वीर दल की सक्रिय भागीदारी:
    • कार्यक्रम में आर्यवीर एवं आर्य वीरांगना दल के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • आर्य समाज मंदिर आर्य नगर दुर्ग के प्रमुख व्यक्तित्वों में
    • संजय आर्य (प्रधान), मनोज आर्या (मंत्री), कृष्णमूर्ति आर्य (कोषाध्यक्ष) डॉ अजय आर्य (विद्वान) : आर्य समाज मंदिर सेक्टर 6 के आचार्य अंकित शर्मा (पुरोहित),
    • रूपेंद्र आर्य (सार्वदेशिक आर्य वीर दल के व्यायाम शिक्षक), हिमांशु आर्य (जिला मंत्री), साक्षी आर्या (आर्य वीर दल जिला संचालिका), कविता आर्या (जिला मंत्री)
    • अंतरंग सदस्य में- नीता चौरसिया जी, बसंती यादव जी, दामिनी साहू , किरण आर्या ,अंकित आर्य, तुषार आर्य ,आयुष आर्य, आनंद आर्य ,बजरंग दल से विभाग संचालक श्री राम लोचन तिवारी जी ,जिला संचालक श्री सौरभ देवांगन जी
    • एवं समस्त आर्य समाज आर्य वीर दल एवं छत्तीसगढ़ प्रांतीय आर्य प्रतिनिधि सभा के सदस्य गण उपस्थित रहे।

निष्कर्ष:

यह आयोजन न केवल एक श्रद्धांजलि था, बल्कि समाज में सुधार और जागरूकता की प्रेरणा देने का भी एक प्रयास था। इस प्रकार के कार्यक्रमों से नई पीढ़ी को स्वामी दयानंद और स्वामी श्रद्धानंद जी के विचारों से अवगत कराने और सामाजिक सुधार में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा मिलती है।