ओ३म् रस बरसे रे मनवा !!
ओ३म् रस बरसे
रे मनवा !!
प्रेम रस बरसे
ओ३म् रस बरसे
रे मनवा !!
प्रेम रस बरसे
रे मन !! चातक
क्यों तरसे
रे मनवा !!
प्रेम रस बरसे
बूँद बूँद में दया
हरी की (1)
बरसे अङ्गन से
क्यों तु छुपा है
बोल बावरे
भींचन के डर से
ओ३म् रस बरसे
रे मनवा !!
प्रेम रस बरसे
देख खोज
रहा वन वन में
पूछत दर दर से
मन मन्दिर में
ओ३म् बसे हैं
क्यों न चरण बरसे
ओ३म् रस बरसे
रे मनवा !!
प्रेम रस बरसे
रे मन चातक !
क्यों तरसे
रे मनवा !!
प्रेम रस बरसे










