ये महकती बगिया, ये फूल और कलियाँ
ये महकती बगिया
ये फूल और कलियाँ
प्रभु का पता दे रहे हैं सभी
उस प्रभु का पता दे रहे हैं सभी
ये जो सरिताएँ सर-सर बहती हैं
मानो ये उसकी ही बातें कहती हैं
ऊँचें पर्वत सागर खारे, बहते नदी के धारे
प्रभु का पता दे रहे हैं सभी
उस प्रभु का पता दे रहे हैं सभी
कोयल उसके ही नग्में गाती है
सबके मन को जो हर्षाती है
ये ऋतुएँ ये मस्त बहारें
ये पँछी प्यारे-प्यारे
प्रभु का पता दे रहे हैं सभी
उस प्रभु का पता दे रहे हैं सभी
बन के फूलों में खुशबू रहता है
सारा ये गुलशन उसी से महका है
हर गुच्छा ये फल व चनारे
सूरज चाँद सितारे
प्रभु का पता दे रहे हैं सभी
उस प्रभु का पता दे रहे हैं सभी
सबसे बढ़ के है उसकी कारीगरी
ऐसी कारीगरी न किसी ने करी
“जगपाल आर्य” प्राणी सारे रूप तुम्हारे हमारे
प्रभु का पता दे रहे हैं सभी
उस प्रभु का पता दे रहे हैं सभी
ये महकती बगिया
ये फूल और कलियाँ
प्रभु का पता दे रहे हैं सभी
उस प्रभु का पता दे रहे हैं सभी










