रे मन ! उसका कर चिन्तन
रे मन ! उसका कर चिन्तन
उसका कर चिन्तन
रे मन ! उसका कर चिन्तन
उसका कर चिन्तन
ऊँचे-ऊँचे व्योम विचुम्बित
आऽऽऽआऽऽऽआऽऽऽऽआ
ऊँचे-ऊँचे व्योम विचुम्बित
शैल – शृंग उत्तुंग हिमावृत
करते जिसका आराधन
आराधन आराधन आराधन आराधन
रे मन ! उसका कर चिन्तन
उसका कर चिन्तन
विरहिन व्याकुल-सी सरिताएँ
आऽऽऽआऽऽऽआऽऽऽऽआ
विरहिन व्याकुल-सी सरिताएँ
बढ़ा-बढ़ा कर दीर्घ भुजाएँ
करती जिसका आह्वाहन
आह्वाहन आह्वाहन आह्वाहन आह्वाहन
रे मन ! उसका कर चिन्तन
उसका कर चिन्तन
युग-युग के वियोग से विव्हल
आऽऽऽआऽऽऽआऽऽऽऽआ
युग-युग के वियोग से विव्हल
सागर जिसे पुकारे प्रतिपल
करता जिसका अभिनन्दन
अभिनन्दन अभिनन्दन अभिनन्दन अभिनन्दन
रे मन ! उसका कर चिन्तन
उसका कर चिन्तन
रे मन ! उसका कर चिन्तन
उसका कर चिन्तन










