जिसके मन में लोभ बसे,उसे अवगुण और कमाना क्या।

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(१)🪴💐🌹
जिसके मन में लोभ बसे,
उसे अवगुण और कमाना क्या।
नित ही सद् उपदेश करे जो,
उसे तीर्थ पै जाना क्या।
अपयश जिसका फैला उसको,
मृत्यु से भय खाना क्या।
“धर्मवीर”जब धर्मी है,
तब एक को मित्र बनना क्या।

(२)💐🌹🌲
संगत का जो प्रेमी है और,
गुण हृदय में धरता है।
विद्या का अभिलाषी पूरा,
मान गुरु का करता है।
निज त्रिया से प्रेम करे,
और निंदा से नित डरता है।
“धर्मवीर”है ऐसा जन जग में,
कष्ट और के हारता है।

(३)🪴🌲🌹💐
दुख में धीरज दिन दुखी पर,
अपनी दया दिखाते हैं।
चतुराई से बात करें और,
रण में बल दिखलाते हैं।
यश की नित अभिलाषा करते,
गीत ईश के गाते हैं।
“धर्मवीर”ऐसे जन जग में,
सच्चे देव कहाते हैं।

(४)🪴🌹💐🌲
मात पिता की आज्ञा पाले,
सबसे प्रेम बढ़ता है।
जो स्वामी की करे भलाई,
वह त्रिया सूख दाता है।
सच्चा मित्र उसे कहते,
जो दुख में साथ निभाता है।
“धर्मवीर”इन तीनों को,
कोई पुण्यवान ही पता है।