आर्य समाज जंडियाला गुरु द्वारा अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और वैदिक परंपरा के साथ 68वाँ वार्षिक उत्सव तथा अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती जी के बलिदान के 100 वर्ष पूर्ण होने पर बलिदान शताब्दी समारोह का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह पावन कार्यक्रम वीरवार 7 मई 2026 से रविवार 10 मई 2026 तक आयोजित होगा।
यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि वैदिक संस्कृति, राष्ट्रभक्ति, चरित्र निर्माण और समाज जागरण का एक प्रेरणादायक महासंगम है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं, परिवारों, युवाओं तथा समाज के सभी वर्गों को आमंत्रित किया गया है।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ
इस चार दिवसीय समारोह में प्रतिदिन अनेक वैदिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मुख्य रूप से —
- चतुर्वेद शतकम् महायज्ञ
- वेद मंत्रों का पावन उच्चारण
- भजन एवं वेद कथा
- वैदिक प्रवचन
- बलिदान शताब्दी विशेष सम्मेलन
- आर्य विद्वानों का आशीर्वाद
- ऋषि लंगर की व्यवस्था
विशेष रूप से रविवार, 10 मई 2026 को विश्व शांति चतुर्वेद शतकम् महायज्ञ पूर्णाहुति संपन्न होगी।
समय-सारणी
7 मई से 9 मई 2026
प्रातः 7:00 बजे से 10:00 बजे तक
चतुर्वेद शतकम् महायज्ञ, भजन एवं वेद कथा
रात्रि 8:00 बजे से 10:30 बजे तक
भजन एवं वेद कथा

10 मई 2026 (विशेष दिवस)
प्रातः 8:00 बजे से 9:30 बजे तक
महायज्ञ पूर्णाहुति
प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक
स्वामी श्रद्धानंद जी बलिदान शताब्दी समारोह सम्मेलन
विशिष्ट अतिथि एवं वक्तागण
इस भव्य समारोह में अनेक विद्वान, आचार्य एवं भजनोपदेशक अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम को दिव्यता प्रदान करेंगे।
मुख्य अतिथि :
श्री रणजीत आर्य जी
(आर्य प्रतिनिधि सभा, जालंधर, पंजाब)

वक्ता :
श्री आचार्य डॉ. उदयन आर्य जी
श्री आचार्य विष्णुमित्र वेदार्थी जी
श्री यतिन्द्र शास्त्री जी
भजन :
श्री दिनेश कुमार पथिक जी
समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश
यह आयोजन समाज में संस्कार, शांति, सद्भाव और वैदिक जीवन मूल्यों को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। विशेष रूप से युवाओं और परिवारों में चरित्र निर्माण, सामाजिक जागरूकता और धार्मिक चेतना उत्पन्न करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती जी का बलिदान भारतीय समाज और राष्ट्र के लिए एक अमूल्य प्रेरणा है। उनका जीवन साहस, सत्य, शिक्षा और समाज सेवा का अनुपम उदाहरण रहा है।

सभी श्रद्धालुओं से निवेदन
सभी धर्मप्रेमी बंधुओं, माताओं, बहनों एवं युवाओं से विनम्र निवेदन है कि इस भव्य समारोह में परिवार सहित पधारकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएँ तथा वैदिक संस्कृति के इस पावन महोत्सव का लाभ प्राप्त करें।
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