रेजांगला की शौर्यगाथा

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र💐।।रेजांगला की शौर्यगाथा।।💐


चीनी सैनिक अभी, नाम सुनकर थर्राते हैं।
ऐसे वीर अहीरों की हम, कथा सुनाते हैं।।


भारत चीन युद्ध बासठ में, हुआ भयंकर भारी।
गहरे घाव दे गया जिसमें, हुई थी हानि हमारी।।
फिर भी हमें गर्व है उसकी, बजह बताते हैं।
ऐसे वीर अहीरों की हम…।।१।।


वीर सवा सौ थे भारत के, बैठे बिन तैयारी।
आते हुए अचानक देखा, चीनी लश्कर भारी।।
देख यकायक फौज सामने, सँभल न पाते हैं।
ऐसे वीर अहीरों की हम….।।२।।


मेजर शैतान सिंह यों बोले, अपने पास बुलाई।
लड़ मर जाना या घर जाना, दो ये बात बताई।।
जल्दी करो फैसला तुमको, हुक्म सुनाते हैं।
ऐसे वीर अहीरों की हम….।।३।।


कहा यादवों ने मेजर से, कर बन्दूक उठाई।
माँ का कर्ज चुकाने को है,घड़ी आज शुभ आई।।
रण में जो पीठ दिखाते वो,कायर कहलाते हैं।
ऐसे वीर अहीरों की हम….।।४।।


कहके इतनी बात शीघ्र ही, सिंहनाद कर वीरों ने।
रेजांगला के दर्रे पर दी, छाती अड़ा अहीरों ने।।
दुश्मन दल में घुस कर, मारा – मार मचाते हैं।
ऐसे वीर अहीरों की हम….।।५।।


खत्म हुआ बारूद किन्तु, कर से बन्दूक न छोड़ी।
गुत्थमगुत्था कर शेरों ने, कमर गीदड़ों की तोड़ी।।
समर भूमि में लाशों के, अम्बार लगाते हैं।
ऐसे वीर अहीरों की हम….।।६।।


सिर्फ सवा सौ वीरों ने, तेरह सौ चीनी मार दिए।
जिन्दा बचे”कर्मयोगी”छःसारे स्वर्ग सिधार लिए।।
चीनी अफसर आकर जिनको, शीश नवाते हैं।
ऐसे वीर अहीरों की हम….।।७।।


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कवि/गीतकारः रामऔतार आर्य “कर्मयोगी” एटा