वैदिक भजन

मन मीत बसा मन में

मन मीत बसा मन में मन मीत बसा मन में,मन के दर्पण को देखा नहीं।कभी निराकार मानाकभी साकार माना,उलझे हैं उलझन...
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प्रेमी बनकर प्रेम से प्रेमी बनकर प्रेम से,ईश्वर के गुण गाया कर।मन-मन्दिर में गाफिला,झाडू रोज लगाया कर। देख दया उस परमेश्वर की,वेदों...
प्रभु प्यारे से जिसका सम्बन्ध है प्रभु प्यारे से जिसका सम्बन्ध है,उसको हरदम आनन्द ही आनन्द है। झूठी ममता से करके किनारा,लेके...
मेरा बिछौना ओढ़ना होपवित्र परमेश्वर।मेरा बैठना दौड़ना होपवित्र पमेश्वर……. विजय कृपा अपनी करनाहम सब पर परमेश्वर।हों पवित्र मेरे पड़ोसियों केघर भी...
तुम्हारे दिव्य दर्शन की तुम्हारे दिव्य दर्शन कीमैं इच्छा ले के आया हूँ।पिला दो प्रेम का अमृतपिपासा लेके आया हूँ। 'प्रकाशानन्द' हो...
मेरे देवता मुझको देना सहारा मेरे देवता मुझको देना सहारा-कहीं छूट जाये ना दामन तुम्हारा। तेरे गीत हरदम गाता रहूँ मैं,सुबह-शाम तुझको...
क्या से क्या हो जाए सज्जन संग में। अमीचन्द तज सुरासुन्दरी ऋषिवर वचन सुनाए।पापपंक धो शुद्ध कियामन हीरा बन दिखलाए ॥ पद्म-पत्र...
बड़ी श्रद्धा से सत्संग में आते चलो। बड़ी श्रद्धा से सत्संग मेंआते चलो।मन को विषयों के विष सेहटाते चलो ॥ देखना...
भला करो भगवान् सबका भला करो। आशानन्द जब अन्त समय हो,रोम रोम में ओम् की लय हो।ओ३म् से छूटें प्राण-सबकाभला...
भजन 3 (तर्ज-नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे……) सदा फूलता फलता भगवन्,यह याजक-परिवार रहे।रहे प्यार जो किसी से इनका,सदा आपसे प्यार रहे॥ मिथ्या कर अभिमान...
सत्संग भजनावली (तर्ज-रामायण चोपाई) गायक गुणी कवि शायरना राग-रागिनी गाता हूं।यह मानव-मानव बन जाएमैं ऐसा राग सुनाता हूं ॥ भूले जो...
होवे दुनियां का उपकार होवे दुनियां का उपकारहवन के करने से-२ 'पृथ्वीसिंह' तूने कविताई,बिना स्वर और ताल सदा गाई।फिर भी सफल प्रचार...